शनिवार, 14 अगस्त 2010

स्वंत्रता दिवस मुबारक

ये मेरा वतन

ये तेरा चमन
ये मेरी ईमानदारी
ये तेरी दरियादिली
ये मेरा ज्ञान
ये तेरा ध्यान


ये मेरी आरजू
ये तेरी जुस्तजू
ये मेरी भक्तियाँ
ये तेरी शक्तियां


यही तो हमारे देश की रौनक है, दौलत है
यही हमारा विश्वास है
और इसका हमें आभास है
आइये लेते हैं हम संकल्प
इस खजाने को हम सुरक्षित रखेंगे, संरक्षित करेंगे, बढाते रहेंगे




स्वंत्रता दिवस मुबारक




अलका सर्वत मिश्रा


3 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा यह धरोहर सुरक्षित रखना ही होगा

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  2. सबसे पहले आभार.मैं भी देर से ही आया.
    आपकी बातों से सहमत.धन्यवाद.

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  3. सुंदर लगी ये देश के प्रति समर्पित कविता ।

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